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Vol. 3 No. 1

2026
Utility of Indian Knowledge Tradition in Human Life
Published: February 15, 2026

भारत की ज्ञान परंपरा विश्व की प्राचीनतम और सबसे समृद्ध परंपराओं में से एक है। यह केवल सूचनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है, जो 'सत्य' की खोज और 'लोक-कल्याण' की भावना पर आधारित है। ऋग्वेद का उद्घोष "आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वतः" (अर्थात् सभी दिशाओं से हमें कल्याणकारी विचार प्राप्त हों) इस परंपरा की उदारता और ग्रहणशीलता का प्रतीक है।

प्रस्तुत संपादित पुस्तक 'मानव जीवन में भारतीय ज्ञान परंपरा का उपयोग ' उन शोधार्थियों, आचार्यों और विचारकों के लेखों का संकलन है, जिन्होंने भारतीय प्रज्ञा के विभिन्न पहलुओं को आधुनिक संदर्भों में टटोलने का प्रयास किया है।

प्रमुख स्तंभ (Key Themes of the Book)

इस पुस्तक को मुख्य रूप से चार वैचारिक खंडों में विभाजित किया गया है:

  1. विज्ञान और तकनीक
  2. पर्यावरण और सह-अस्तित्व
  3. महिला सशक्तिकरण और समाज
  4. प्रबंधन और शिक्षा

यह पुस्तक केवल अतीत का गुणगान नहीं करती, बल्कि वर्तमान की समस्याओं—चाहे वह मानसिक तनाव हो, आर्थिक असमानता हो या पर्यावरणीय विनाश—के लिए भारतीय चक्षु से समाधान खोजने का प्रयास करती है।

हम उन सभी विद्वान लेखकों के आभारी हैं जिन्होंने अपने गहन शोध के माध्यम से इस ग्रंथ को पूर्णता प्रदान की। हमें विश्वास है कि यह संकलन शिक्षाविदों, नीति निर्धारकों और जिज्ञासु पाठकों के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा।

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